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Friday, 22 May 2020

एकत्व

कोई अर्थ नहीं, किसी 
और के स्तित्व का यहाँ | 
एक ये मेरा जीवन है, 
और, ये एकमात्र 
मेरा एकत्व है |

ऊपर कौन भगवान,
और, नीचे कौन शैतान,
कुछ मायने नहीं 
किसी के भी यहाँ | 
कुछ है तो, 
मिला जुला कर 
मैं ही हूँ बस |
कोई और नहीं यहाँ ,
बस एक मैं हूँ 
और एक मेरा एकत्व है |

ये सभ्यता समाज,
ये दोस्त परिवार ,
सब क्षणिक हैं |
ये रंग रूप, 
ये दौलत शोहरत, 
सब सामयिक हैं | 
जो कुछ अक्षय है, 
वो एक मैं हूँ बस | 
एक मेरा जीवन है, 
और एक ये मेरा एकत्व है |

Saturday, 10 February 2018

साथ नहीं रहेंगे

तुम रात बनना,
मैं दिन बनूँगा
हम दोनों कभी भी
एक साथ नहीं रहेंगे
पर, जब तुम जाने वाली होगी
और मैं आ रहा होऊंगा
या, जब तुम आने वाली होगी
और मैं जा रहा होऊंगा
वो शाम और भोर में
हम मिलेंगे जरूर, और
उस सन्नाटे में ऐसे मिलेंगे
कि, उससे सुन्दर शोर इस जहाँ ने
न पहले कभी सुना होगा
न पहले महसूस किया होगा

तुम ज़मीं बनना
मैं आसमा बनूँगा
हम दोनों के बीच
ज़मीन-ओ-आसमान  के
फासले होंगे
पर, क्षितिज पर
हम जरूर मिलेंगे
लोग हमारी मुलाक़ात को
देखेंगे, दंग रह जाएंगे
हम उस मुलाक़ात की
एक तस्वीर बनाएंगे फिर
ऐसी खुशनुमा तस्वीर जो
किसी ने कभी न सोची होगी
न किसी ने रंगी होगी

फिर, उस क्षितिज पर जब
वो डूबता हुआ सूरज
उगते हुए चाँद से मिलेगा
या, वो उगता हुआ सूरज
डूबते हुए चाँद से मिलेगा
और पूछेगा कैसी हो तुम?
बड़े वक़्त बाद मिलना हुआ
ये जहाँ तब खिल उठेगा
हम पल भर के लिए ऐसे मिलेंगे
पर हम दोनों कभी भी
साथ नहीं रहेंगे,
साथ नहीं रहेंगे |