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Friday, 22 May 2020

एकत्व

कोई अर्थ नहीं, किसी 
और के स्तित्व का यहाँ | 
एक ये मेरा जीवन है, 
और, ये एकमात्र 
मेरा एकत्व है |

ऊपर कौन भगवान,
और, नीचे कौन शैतान,
कुछ मायने नहीं 
किसी के भी यहाँ | 
कुछ है तो, 
मिला जुला कर 
मैं ही हूँ बस |
कोई और नहीं यहाँ ,
बस एक मैं हूँ 
और एक मेरा एकत्व है |

ये सभ्यता समाज,
ये दोस्त परिवार ,
सब क्षणिक हैं |
ये रंग रूप, 
ये दौलत शोहरत, 
सब सामयिक हैं | 
जो कुछ अक्षय है, 
वो एक मैं हूँ बस | 
एक मेरा जीवन है, 
और एक ये मेरा एकत्व है |

Monday, 30 October 2017

अकेलापन

कुछ तो बात है इक इसमें, जो
कोई हो तो भी साथ रहे , और जो
कोई ना हो तो और भी पास आए

जाने कितने ज़माने आए-गए,
जाने कितने एहसास छू कर गुजर गए,
कितनी सदियाँ और कितने ही मौसम
गरज़-बरस, तरस भी गए
पर बस एक ये जिद पे अड़ा था,
जो न गुजरा, ना ही बिखरा
न टूटा, न छूटा, भले दम जो मेरा घूँटा
जो हर मोड़, हर कदम, हर एक दम
मेरे साथ टिका खड़ा रहा,  वो था
अकेलेपन का खूंटा

जिसे देखो वो अकेलेपन से दूर जाना चाहे
भाई , एक बात बता मुझे,
ऐसी क्या तक़लीफ़ तुझे इसमें नज़र आए
इस बेदर्द दुनियादारी सा तो नहीं है ना
सपने बुनता, दिखाता, झकझोरता नहीं है ना
मौसम के साथ रंग बदलता नहीं है ना
जो ये कल था, वही आज भी है
गर कल को कुछ हुआ भी तो,
कल को बस ये तुम्हारी ओर और बढ़ेगा
गले लगाएगा , और जोर से चिपकेगा
उम्र भर का भरोसा है इसपे हमको ज़नाब
भरे बाजार में तार-तार बेज़ार शर्म-ओ-सार नहीं करेगा 

ये आग में तपाया, चमकाया, खरा सोना है
तुम क्या जानो क्या ऐसे साथी का होना है
ये मेरा है, बस मेरा अपना, इसमें मेरा अपनापन
पूरे ज़माने से ये अकेला भिड़ेगा, ये
मेरा अकेलापन |