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Tuesday, 3 July 2018

ऐसा पहली बार नहीं था

सुबह सुबह एक ख्याल से
आज मेरी नींद खुल गयी। 
ऐसा नहीं था कि मैंने फिर
सोने की कोशिश नहीं की,
पर नींद नहीं आती थी। 
मैं शायद फिर सोना ही
नहीं चाहता था। 
मुझे डर लगने लगा था,
सोते वक़्त आने वाले
उन सपनों से।
ऐसा पहली बार नहीं था,
पहले भी हो चुका था।

मुझे पता था मैंने जो
किया, वो गलत था,
मैं शायद सही कर
तो सकता था पर,
मैंने उसे टाल दिया था, 
ये सोचकर कि मेरे
अभी पास वक़्त है।
ऐसा पहली बार नहीं था,
मैं पहले भी ऐसा कर चुका था।

पर, इस बार मैं गलत था
मेरे पास वक़्त नहीं था।
बहुत देर कर दी
इस बार, बहुत देर।
वो चले गए फिर।
मैंने अपनी डायरी में
सब लिख तो दिया था,
पर,
किसी को कभी कुछ कहा नहीं।
ऐसा पहली बार नहीं था,
पहले भी मैं ऐसा कर चुका था।
शायद मुझे ऐसा
नहीं करना चाहिए था। 

Saturday, 20 January 2018

नींद

मैं नींद हूँ और मेरे भी
अपने अलग मिज़ाज़ हैं 
अपनी मर्जी का
मालिकाना हक़ है मुझे
मेरा मन जब करे
तब मैं आउंगी
ना मन करे तो
जो उखाड़ना है उखाड़ लो
नहीं आना मतलब
मुझे नहीं आना

अभी तो तुम जवान हो
मेरे बारे में मत सोचो
तुम सपनो का जाल बुनते रहो
बिना मेरे भी सपने आते हैं
मेरे वाले सपने जो हैं ना
वो गीले साबुन के बुलबुले हैं
हवा लगते ही फूट जायेंगे
सपना वो देखो जो तुम्हें 
मेरी याद ना आने दे
मेरी ख्वाहिश मत करो
मैंने बहुत दुनिया देखी है
मैं नींद हूँ

मैं बता रही हूँ
डरो मुझसे, डरो
एक दिन पूरी शिद्दत से
बोरिया बिस्तर लेकर आउंगी
हमेशा के लिए साथ रहने
फिर न कोई रास्ता होगा
और ना कोई रहगुजर
आखिरी नींद होगी तुम्हारी
बहुत लम्बी नींद
ऐसी गहरी नींद, जो तुम
जगाये न जागो
मैं वो नींद भी हूँ